जोनिंग-जोनिंग - श्लोक पद 35

जोनिंग-जोनिंग

पद 35

क्षेत्र क्षेत्रज्ञान योरेव्मन्त्रम ज्ञानचक्षुष। भूतप्राकृतिमोक्ष च ये विद्यावंती ते परम। 13-35।

अनुवाद

.. 13.35। एहि तरहेँ, जे पुरुष ज्ञानक दृष्टिसँ क्षेत्र आ क्षेत्रजनक बीचक अन्तर आ प्रकृतिसँ मुक्तिकेँ जनैत छथि, ओ सर्वोच्च ब्रह्म प्राप्त करैत छथि।

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