भक्ति योग - श्लोक पद 9
भक्ति योग
पद 9
ई मन शान्ति मे नहि रहि सकैत अछि, मुदा हम शान्ति मे छी।
अनुवाद
.. 12. 9. ओ प्यारी! जँ अहाँ हमरा पर अपन मन स्थिर नहि कऽ सकैत छी तँ अभ्याससँ अहाँ हमरा प्राप्त करबाक इच्छा (अर्थात् प्रयास) करैत छी।
ई मन शान्ति मे नहि रहि सकैत अछि, मुदा हम शान्ति मे छी।
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