भक्ति योग - श्लोक पद 2

भक्ति योग

पद 2

श्रीभगवानुवाचा | मायावेश्यमानो ये मामा नित्युक्ता उपसेते | श्रद्या प्रयोपेता: ते में युक्तमा माता: | 12-2 |

श्रीभगवानुवाच

अनुवाद

.. 12. 2. भगवान कहलनि, "जे भक्त पूर्ण श्रद्धासँ हमर पूजा करैत छथि, जे हमरा पर ध्यान केन्द्रित कऽ नित्य-युक्त बनि गेल छथि, ओ हमर विचारमे युक्तम अर्थात् श्रेष्ठ छथि।"

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