विश्वरूपन्योग - श्लोक पद 53
विश्वरूपन्योग
पद 53
न वैदिक तपस्वी, न दानई आ न क्षत्रिय। सम्भावित आ दृश्यमान माता।। 11-53। क रूपमे।
अनुवाद
.. 11.53। हमरा न वेदसँ, न तपसँ, न दानसँ, न यज्ञसँ देखाओल जा सकैत अछि जेना अहाँ हमरा देखलहुँ।
न वैदिक तपस्वी, न दानई आ न क्षत्रिय। सम्भावित आ दृश्यमान माता।। 11-53। क रूपमे।
.. 11.53। हमरा न वेदसँ, न तपसँ, न दानसँ, न यज्ञसँ देखाओल जा सकैत अछि जेना अहाँ हमरा देखलहुँ।
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