विश्वरूपन्योग - Verse श्लोक 45
विश्वरूपन्योग
श्लोक 45
भाग्यसँ ओकरा देखि हमरा बड्ड डर लगैत छल।
Translation
.. 11.45 हम अहाँक एहि दुर्भाग्यपूर्ण रूप पर प्रसन्न छी आ हमर हृदय भय सँ भरल अछि। ओह, हे भगवान! अहाँ बस हमरा ओ अतीत देखाउ। ओह यार! ओ प्यारी! अहाँ खुश रहब..