राजविद्या राजगुह्ययोग - श्लोक श्लोक 28

राजविद्या राजगुह्ययोग

श्लोक 28

शुभाशुभफलैरेवं मोक्ष्यसे कर्मबन्धनैः |

संन्यासयोगयुक्तात्मा विमुक्तो मामुपैष्यसि ||९-२८||

अनुवाद

।।9.28।। इस प्रकार तुम शुभाशुभ फलस्वरूप कर्मबन्धनों से मुक्त हो जाओगे; और संन्यासयोग से युक्तचित्त हुए तुम विमुक्त होकर मुझे ही प्राप्त हो जाओगे।।

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