राजविद्या राजगुह्ययोग - श्लोक श्लोक 27

राजविद्या राजगुह्ययोग

श्लोक 27

यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत् |

यत्तपस्यसि कौन्तेय तत्कुरुष्व मदर्पणम् ||९-२७||

अनुवाद

।।9.27।। हे कौन्तेय ! तुम जो कुछ कर्म करते हो, जो कुछ खाते हो, जो कुछ हवन करते हो, जो कुछ दान देते हो और जो कुछ तप करते हो, वह सब तुम मुझे अर्पण करो।।

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