राजविद्या राजगुह्ययोग - श्लोक श्लोक 16
श्लोक 16
अहं क्रतुरहं यज्ञः स्वधाहमहमौषधम् |
मन्त्रोऽहमहमेवाज्यमहमग्निरहं हुतम् ||९-१६||
अनुवाद
।।9.16।। मैं ऋक्रतु हूँ; मैं यज्ञ हूँ; स्वधा और औषध मैं हूँ, मैं मन्त्र हूँ, घी हूँ, मैं अग्नि हूँ और हुतं अर्थात् हवन कर्म मैं हूँ।।