दैवासुरसम्पद्विभागयोग - श्लोक श्लोक 20

दैवासुरसम्पद्विभागयोग

श्लोक 20

आसुरीं योनिमापन्ना मूढा जन्मनि जन्मनि |

मामप्राप्यैव कौन्तेय ततो यान्त्यधमां गतिम् ||१६-२०||

अनुवाद

।।16.20।। हे कौन्तेय ! वे मूढ़ पुरुष जन्मजन्मान्तर में आसुरी योनि को प्राप्त होते हैं और ( इस प्रकार) मुझे प्राप्त न होकर अधम गति को प्राप्त होते है।।

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