गुणत्रयविभागयोग - श्लोक श्लोक 16
गुणत्रयविभागयोग
श्लोक 16
कर्मणः सुकृतस्याहुः सात्त्विकं निर्मलं फलम् |
रजसस्तु फलं दुःखमज्ञानं तमसः फलम् ||१४-१६||
अनुवाद
।।14.16।। शुभ कर्म का फल सात्विक और निर्मल कहा गया है; रजोगुण का फल दु;ख और तमोगुण का फल अज्ञान है।।