क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग - श्लोक श्लोक 19
श्लोक 19
इति क्षेत्रं तथा ज्ञानं ज्ञेयं चोक्तं समासतः |
मद्भक्त एतद्विज्ञाय मद्भावायोपपद्यते ||१३-१९||
अनुवाद
।।13.19।। इस प्रकार, (मेरे द्वारा) क्षेत्र, ज्ञान और ज्ञेय को संक्षेपत: कहा गया। इसे तत्त्व से जानकर (विज्ञाय) मेरा भक्त मेरे स्वरूप को प्राप्त होता है।।