विश्वरूपदर्शनयोग - श्लोक श्लोक 9

विश्वरूपदर्शनयोग

श्लोक 9

सञ्जय उवाच |

एवमुक्त्वा ततो राजन्महायोगेश्वरो हरिः |

दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम् ||११-९||

संजय उवाच

अनुवाद

।।11.9।। संजय ने कहा -- हे राजन् ! महायोगेश्वर हरि ने इस प्रकार कहकर फिर अर्जुन के लिए परम ऐश्वर्ययुक्त रूप को दर्शाया।।

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