विभूतियोग - श्लोक श्लोक 1
श्लोक 1
श्रीभगवानुवाच |
भूय एव महाबाहो शृणु मे परमं वचः |
यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया ||१०-१||
अनुवाद
।।10.1।। श्रीभगवान् ने कहा -- हे महाबाहो ! पुन: तुम मेरे परम वचनों का श्रवण करो, जो मैं तुझ अतिशय प्रेम रखने वाले के लिये हित की इच्छा से कहूँगा।।