राजविद्या राजगुह्ययोग - श्लोक श्लोक 15

राजविद्या राजगुह्ययोग

श्लोक 15

ज्ञानयोगीने चाप्यान्ये यजंतो मामुपासाते। एकतानते सेखातायन बहुत विश्वतोमुखम। 9-15।

अनुवाद

.. 9. 15. किछु गोटे ज्ञान यज्ञक माध्यमसँ हमर पूजा करैत छथि आ एकताक भावसँ हमर पूजा करैत छथि, किछु गोटे भिन्न भावसँ, किछु गोटे सर्वोच्च आत्मा (विश्वतो मुखम) क रूपमे हमर पूजा करैत छथि।

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