अक्षर ब्रह्मयोग - श्लोक श्लोक 21

अक्षर ब्रह्मयोग

श्लोक 21

Avyakta Asmakshara ज्यास्तमाहु: परमान गतिम् | 8-21 |.

अनुवाद

.. 8. 21. जकरा अव्यक्त अक्षर कहल जाइत अछि ओ परम गति (लक्ष्य) अछि। जे (साधक) एकरा प्राप्त कयलाक बाद (दुनियामे) नहि अबैत अछि, ओ हमर सर्वोच्च निवास अछि।

मात्र पढ़बासँ बेसी -
अपन ध्यान वीडियो बनाउ।

पवित्र श्लोककेँ दुनियाक सङ्ग साझा करबाक लेल सुन्दर, सिनेमाई वीडियोमे बदलि दियौक। अपन पृष्ठभूमि चुनू, मंत्र ऑडियो जोड़ू, आ आधुनिक प्रारूपमे गीताक प्रकाशकेँ फैलाउ।

एहि सुविधासभ लेल ऐप डाउनलोड करू

  • उच्च गुणवत्ता वाला पृष्ठभूमि कलाकृति
  • संस्कृत आ अर्थ पाठकेँ समन्वित कयल गेल
  • इमर्सिव चैन्टिंग आ संगीत
Video Generation Preview

गहन विसर्जनक अनुभव करू

नित्य गीताक पूर्ण संस्करणक सङ्ग सिनेमाई आध्यात्मिक यात्राक शुरुआत करू। उच्च गुणवत्ता वाला मंत्र, प्रामाणिक अनुवाद, आ अपन हाथ के हथेली मे एक शांतिपूर्ण ध्यान अभयारण्य।