ज्ञान-विज्ञान - श्लोक श्लोक 24

ज्ञान-विज्ञान

श्लोक 24

अप्रकट व्यक्तिकेँ माम्बद्धी मानल जाइत छैकः।, मुदा भावम्जनन्तो मामवम्नुत्तम्।। 7-24।।।

अनुवाद

.. 7. 24. बुद्धिहीन लोक, हमर सर्वोच्च (सर्वश्रेष्ठ) निरपेक्ष आत्माकेँ नहि जनैत, हमरा अप्रकटमे प्रकट मानैत छथि।

मात्र पढ़बासँ बेसी -
अपन ध्यान वीडियो बनाउ।

पवित्र श्लोककेँ दुनियाक सङ्ग साझा करबाक लेल सुन्दर, सिनेमाई वीडियोमे बदलि दियौक। अपन पृष्ठभूमि चुनू, मंत्र ऑडियो जोड़ू, आ आधुनिक प्रारूपमे गीताक प्रकाशकेँ फैलाउ।

एहि सुविधासभ लेल ऐप डाउनलोड करू

  • उच्च गुणवत्ता वाला पृष्ठभूमि कलाकृति
  • संस्कृत आ अर्थ पाठकेँ समन्वित कयल गेल
  • इमर्सिव चैन्टिंग आ संगीत
Video Generation Preview

गहन विसर्जनक अनुभव करू

नित्य गीताक पूर्ण संस्करणक सङ्ग सिनेमाई आध्यात्मिक यात्राक शुरुआत करू। उच्च गुणवत्ता वाला मंत्र, प्रामाणिक अनुवाद, आ अपन हाथ के हथेली मे एक शांतिपूर्ण ध्यान अभयारण्य।