ज्ञान-विज्ञान - श्लोक श्लोक 15
ज्ञान-विज्ञान
श्लोक 15
ना माँ दुष्कृतिनो मुधः प्रपद्यांते नारधमाः। माय्यापपदज्ञाना असुर भवमश्रीथा।। 7-15।
अनुवाद
.. 7. 15. दुष्ट, मूढा, दुष्ट, हमर आज्ञा नहि मानैत छथि। जिनका ज्ञान माय द्वारा छीनल गेल अछि, हुनका लग राक्षसी आत्मा बनल रहैत अछि।