ज्ञान-विज्ञान - श्लोक पद 11

ज्ञान-विज्ञान

पद 11

हम अपन शक्ति मजबूत करय चाहैत छी। हम धर्मक विरुद्ध काज करय चाहैत छी।

अनुवाद

.. 7. 11. ओह, भारत श्रेष्ठ! हम बलवानक इच्छा छी, आ आसक्तिसँ रहित शक्ति छी, आ अभिषिक्त अर्थात् सभ भूतमे धर्मक अनुकूल कार्य छी।

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