गणना - श्लोक श्लोक 60

गणना

श्लोक 60

यथो ही कौन्तेया पुरुष विशिष्ठ। इन्द्रियानी प्रमथी नी हरंती प्रसादम मन। 2-60।

अनुवाद

.. 2. 60। ई इन्द्रिया कोनो बुद्धिमान (विशिष्ठ) व्यक्तिक मनकेँ सेहो बलपूर्वक छीन लैत अछि जखन ओ कौंटेय (संयम) लेल प्रयास कऽ रहल अछि।

मात्र पढ़बासँ बेसी -
अपन ध्यान वीडियो बनाउ।

पवित्र श्लोककेँ दुनियाक सङ्ग साझा करबाक लेल सुन्दर, सिनेमाई वीडियोमे बदलि दियौक। अपन पृष्ठभूमि चुनू, मंत्र ऑडियो जोड़ू, आ आधुनिक प्रारूपमे गीताक प्रकाशकेँ फैलाउ।

एहि सुविधासभ लेल ऐप डाउनलोड करू

  • उच्च गुणवत्ता वाला पृष्ठभूमि कलाकृति
  • संस्कृत आ अर्थ पाठकेँ समन्वित कयल गेल
  • इमर्सिव चैन्टिंग आ संगीत
Video Generation Preview

गहन विसर्जनक अनुभव करू

नित्य गीताक पूर्ण संस्करणक सङ्ग सिनेमाई आध्यात्मिक यात्राक शुरुआत करू। उच्च गुणवत्ता वाला मंत्र, प्रामाणिक अनुवाद, आ अपन हाथ के हथेली मे एक शांतिपूर्ण ध्यान अभयारण्य।