गणना - श्लोक पद 56

गणना

पद 56

Dukheshvanudvignamana: सुक्षेश्वनुद्विग्नमाना: सुक्षेशु पित्तस्प्रहा: वित्राग्यभायक्रोधा: स्थिद्धिमनिर्मुनिरुनिता | 2-56 |.

अनुवाद

.. 2, 56। जकर मन दुःखमे उत्तेजित नहि होइत अछि, जकर आत्मा सुखमे निवृत्त होइत अछि? ई कोनाक दिल छै? की भय आ क्रोध समाप्त भऽ गेल अछि? हुनका मुनि स्थितप्रज्ञा कहल जाइत अछि।

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