गणना - श्लोक पद 41
गणना
पद 41
कुरुनन्दन।।।।।।।।।।।
अनुवाद
.. 2. 41। ओ प्रिय स्वामी! एहि (विषय) मे निर्धारक बुद्धि एक अछि। अज्ञानी व्यक्तिक बुद्धि (इच्छा) बहुत आ अनन्त अछि।
कुरुनन्दन।।।।।।।।।।।
.. 2. 41। ओ प्रिय स्वामी! एहि (विषय) मे निर्धारक बुद्धि एक अछि। अज्ञानी व्यक्तिक बुद्धि (इच्छा) बहुत आ अनन्त अछि।
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