गणना - श्लोक श्लोक 32
गणना
श्लोक 32
स्वर्गक चारि द्वार बन्द भऽ गेल। सुखिनः क्षत्रियः पार्थ लावन्ते युद्धमिदुष्यम। 2-32।
अनुवाद
.. 2. 32। आ ओह प्रिय! केवल भाग्यशाली क्षत्रिय एहि तरहक युद्धकेँ स्वर्गक द्वारक रूपमे देखैत छथि, जे स्वयं प्राप्त करैत छथि।