मोक्षस्ययोग - श्लोक श्लोक 34
मोक्षस्ययोग
श्लोक 34
याया तु धर्मकमर्थन्धृत्य धर्तेय अर्जुन। पार्थ राज्य।। 18-34
अनुवाद
.. 18.34। हे अर्जुन! जे धृति द्वारा कर्मक इच्छुक व्यक्ति स्वयंकेँ धर्म, अर्थ आ काम (ई तीनू पुरुष) सँ जोड़ैत अछि, ओ भव्य अछि।
याया तु धर्मकमर्थन्धृत्य धर्तेय अर्जुन। पार्थ राज्य।। 18-34
.. 18.34। हे अर्जुन! जे धृति द्वारा कर्मक इच्छुक व्यक्ति स्वयंकेँ धर्म, अर्थ आ काम (ई तीनू पुरुष) सँ जोड़ैत अछि, ओ भव्य अछि।
पवित्र श्लोककेँ दुनियाक सङ्ग साझा करबाक लेल सुन्दर, सिनेमाई वीडियोमे बदलि दियौक। अपन पृष्ठभूमि चुनू, मंत्र ऑडियो जोड़ू, आ आधुनिक प्रारूपमे गीताक प्रकाशकेँ फैलाउ।
एहि सुविधासभ लेल ऐप डाउनलोड करू
नित्य गीताक पूर्ण संस्करणक सङ्ग सिनेमाई आध्यात्मिक यात्राक शुरुआत करू। उच्च गुणवत्ता वाला मंत्र, प्रामाणिक अनुवाद, आ अपन हाथ के हथेली मे एक शांतिपूर्ण ध्यान अभयारण्य।
अहाँक योगदान हमरा सभकेँ गीताक ज्ञान सभकेँ, सर्वत्र उपलब्ध कराबयमे मदति करैत अछि।
कोनो यूपीआई ऐपसँ स्कैन करू
जी. पी. ए., फोनपे, पेटीएम, आदि