मोक्षस्ययोग - श्लोक पद 25
मोक्षस्ययोग
पद 25
कर्म इच्छाक क्रिया अछि। 18-25।
अनुवाद
.. 18.25। जे कर्म परिणाम, हानि, हिंसा, आ योग्यता (पौरुषम) पर विचार करै बिना मात्र आसक्तिसँ प्रारम्भ कयल जाइत अछि ओकरा कर्म तमस कहल जाइत अछि।
कर्म इच्छाक क्रिया अछि। 18-25।
.. 18.25। जे कर्म परिणाम, हानि, हिंसा, आ योग्यता (पौरुषम) पर विचार करै बिना मात्र आसक्तिसँ प्रारम्भ कयल जाइत अछि ओकरा कर्म तमस कहल जाइत अछि।
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