मोक्षस्ययोग - Verse पद 17
पद 17
जिनका नकारात्मक भावना बुद्धिमे परिवर्तित नहि होइत अछि। जँ ओसभ सेहो करैत छथि तँ ओहिमेसँ कोनो प्रतिबंधित नहि अछि। 18-17।
Translation
.. 18.17। जाहि मनुष्यमे अहङ्कार आ बुद्धिक भावना नहि अछि, ओ कोनो (गुण दोष) मे लिप्त नहि होइत अछि, कि मनुष्य वास्तवमे नहि मरैत अछि आ एहि सभ दुनियाक हत्या कय सेहो (पापक संग) नहि बाँधैत अछि।