श्रद्धात्रय विभायोग - श्लोक पद 26

श्रद्धात्रय विभायोग

पद 26

सदित्यमे सदभावना आ सद्भवनक प्रयोग होइत अछि। प्रसस्ते करमानी आ सत्चबदाः पार्थ युज्य।

अनुवाद

.. 17.26। ओह प्रिय! 'सत' शब्दक प्रयोग सत्य भाव आ साधु भावमे होइत अछि, आ 'सत' शब्दक प्रयोग प्रशास्त (सर्वश्रेष्ठ, शुभ) कर्ममे होइत अछि।

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