विश्वरूपन्योग - श्लोक श्लोक 40

विश्वरूपन्योग

श्लोक 40

नमः पुरस्तदथा पागस्ते नमस्ते ते सर्वता एव सर्व। अनन्तविर्यमिता विक्रमसायी सर्व समप्नोशी था सर्वः। 11-40।

अनुवाद

.. 11.40। ओह प्रिय भगवान! सामने आ पाछाँ सँ नमस्कार, हे परम-दयावान! अहाँ सभ केँ नमस्कार। अहाँ अमित विक्रमशाली छी आ अहाँ सभ व्याप्त छी, अहाँ सर्वव्यापी छी।

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