विश्वरूपन्योग - श्लोक श्लोक 33

विश्वरूपन्योग

श्लोक 33

स्वर्गक राज्य समृद्ध होअय जाबत धरि धर्मी सुखी छथि आ शत्रु सुखी छथि।

अनुवाद

.. 11.33 एहि लेल उठू आ सफलता प्राप्त करू। अपन शत्रुकेँ जीतू आ समृद्ध राज्यक आनन्द उठाउ। ई सभ हमरा द्वारा मारल जा चुकल अछि। ओ प्यारी! बस अपने हो..

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