विश्वरूपन्योग - श्लोक पद 25

विश्वरूपन्योग

पद 25

शैतानक आँखि मे देखने मे शर्म नहि करू। हुनका मुँह मे देखने मे शर्म नहि करू। 11-25 देवेश जगन्नावास

अनुवाद

.. अहाँक उग्र दाड़ि आ अग्निमय चेहरा देखि हम न दिशा जानि सकैत छी आ न शान्ति प्राप्त कऽ सकैत छी। एहि लेल, हे देवेश! ओ प्यारी! अहाँ खुश रहब..

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