राजविद्या राजगुह्ययोग - श्लोक श्लोक 3
राजविद्या राजगुह्ययोग
श्लोक 3
अश्रद्दधानाः पुरुषा धर्मस्यास्य परन्तप |
अप्राप्य मां निवर्तन्ते मृत्युसंसारवर्त्मनि ||९-३||
अनुवाद
।।9.3।। हे परन्तप ! इस धर्म में श्रद्धारहित पुरुष मुझे प्राप्त न होकर मृत्युरूपी संसार में रहते हैं (भ्रमण करते हैं)।।