राजविद्या राजगुह्ययोग - श्लोक श्लोक 22

राजविद्या राजगुह्ययोग

श्लोक 22

अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते |

तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् ||९-२२||

अनुवाद

।।9.22।। अनन्य भाव से मेरा चिन्तन करते हुए जो भक्तजन मेरी ही उपासना करते हैं, उन नित्ययुक्त पुरुषों का योगक्षेम मैं वहन करता हूँ।।

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