ध्यानयोग - श्लोक श्लोक 42

ध्यानयोग

श्लोक 42

अथवा योगिनामेव कुले भवति धीमताम् |

एतद्धि दुर्लभतरं लोके जन्म यदीदृशम् ||६-४२||

अनुवाद

।।6.42।। अथवा, (साधक) ज्ञानवान् योगियों के ही कुल में जन्म लेता है, परन्तु इस प्रकार का जन्म इस लोक में नि:संदेह अति दुर्लभ है।।

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