ज्ञानकर्मसन्यासयोग - श्लोक श्लोक 33

ज्ञानकर्मसन्यासयोग

श्लोक 33

श्रेयान्द्रव्यमयाद्यज्ञाज्ज्ञानयज्ञः परन्तप |

सर्वं कर्माखिलं पार्थ ज्ञाने परिसमाप्यते ||४-३३||

अनुवाद

।।4.33।। हे परन्तप ! द्रव्यों से सम्पन्न होने वाले यज्ञ की अपेक्षा ज्ञानयज्ञ श्रेष्ठ है। हे पार्थ ! सम्पूर्ण अखिल कर्म ज्ञान में समाप्त होते हैं, अर्थात् ज्ञान उनकी पराकाष्ठा है।।

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