ज्ञानकर्मसन्यासयोग - श्लोक श्लोक 28

ज्ञानकर्मसन्यासयोग

श्लोक 28

द्रव्ययज्ञास्तपोयज्ञा योगयज्ञास्तथापरे |

स्वाध्यायज्ञानयज्ञाश्च यतयः संशितव्रताः ||४-२८||

अनुवाद

।।4.28।। कुछ (साधक) द्रव्ययज्ञ, तपयज्ञ और योगयज्ञ करने वाले होते हैं; और दूसरे कठिन व्रत करने वाले स्वाध्याय और ज्ञानयज्ञ करने वाले योगीजन होते हैं।।

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