कर्मयोग - श्लोक श्लोक 43

कर्मयोग

श्लोक 43

एवं बुद्धेः परं बुद्ध्वा संस्तभ्यात्मानमात्मना |

जहि शत्रुं महाबाहो कामरूपं दुरासदम् ||३-४३||

अनुवाद

।।3.43।। इस प्रकार बुद्धि से परे (शुद्ध) आत्मा को जानकर आत्मा (बुद्धि) के द्वारा आत्मा (मन) को वश में करके, हे महाबाहो ! तुम इस दुर्जेय (दुरासदम्) कामरूप शत्रु को मारो।।

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