श्रद्धात्रयविभागयोग - श्लोक श्लोक 1

श्रद्धात्रयविभागयोग

श्लोक 1

अर्जुन उवाच |

ये शास्त्रविधिमुत्सृज्य यजन्ते श्रद्धयान्विताः |

तेषां निष्ठा तु का कृष्ण सत्त्वमाहो रजस्तमः ||१७-१||

अर्जुन उवाच

अनुवाद

।।17.1।। अर्जुन ने कहा -- हे कृष्ण ! जो लोग शास्त्रविधि को त्यागकर (केवल) श्रद्धा युक्त यज्ञ (पूजा) करते हैं, उनकी स्थिति (निष्ठा) कौन सी है ?क्या वह सात्त्विक है अथवा राजसिक या तामसिक ?

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