क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग - श्लोक श्लोक 34

क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग

श्लोक 34

यथा प्रकाशयत्येकः कृत्स्नं लोकमिमं रविः |

क्षेत्रं क्षेत्री तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत ||१३-३४||

अनुवाद

।।13.34।। हे भारत ! जिस प्रकार एक ही सूर्य इस सम्पूर्ण लोक को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार एक ही क्षेत्री (क्षेत्रज्ञ) सम्पूर्ण क्षेत्र को प्रकाशित करता है।।

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