विश्वरूपदर्शनयोग - श्लोक श्लोक 46

विश्वरूपदर्शनयोग

श्लोक 46

किरीटिनं गदिनं चक्रहस्तं

इच्छामि त्वां द्रष्टुमहं तथैव |

तेनैव रूपेण चतुर्भुजेन

सहस्रबाहो भव विश्वमूर्ते ||११-४६||

अनुवाद

।।11.46।। मैं आपको उसी प्रकार मुकुटधारी, गदा और चक्र हाथ में लिए हुए देखना चाहता हूँ। हे विश्वमूर्ते! हे सहस्रबाहो! आप उस चतुर्भुजरूप के ही बन जाइए।।

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