दैवासुर सम्पद्-विभोग्योग - Verse छंद 1,2 ते 3
छंद 1,2 ते 3
श्रीभगवानूचास। अभ्याया सातवाहनयोग प्रणालीः। दानाददामासीयाजनासासशवादस्तप अर्जवम।। 16-1। अहिंसा सत्यमक्रधास्त्यगगशांतिश्रीपासनम।। दया भूतेश्वलोलुप्तम मर्दवम हृद्रीचपालम।। 16-2
Translation
.. 16. 1. पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान ने आखेआ, "अभय, हृदय दी शुद्धि, ज्ञान योग, दान, दमा, यज्ञ, स्वाध्याय, तप ते अर्जव च दृढ़ता।"... 16. 2. अहिंसा, सत्य, क्रोध दी गैरमौजूदगी, त्याग, शांति, अपैशुनम (कुसै दी बदनामी नेईं करना), भूतें दे प्रति कृपा, अनासक्ति, मर्दवा (कोमलता), लज्जा, अचंचलता...। 16. 3. हे भारत! तेज, क्षमा, धैर्य, शौच (शुद्धि), अद्रोह ते अतिमान (घमंड) दी गैरमौजूदगी दैवी धन कन्नै संपन्न मनुष्या दे संकेत न।