ध्यान - श्लोक पद 27

ध्यान

पद 27

प्रशान्त-मानस योगिनम सुखमुतमम। उपैती-शान्तराजस ब्रह्मभूतमकल्मासम। 6-27।

अनुवाद

.. 2. 27। ई ब्रह्मा-निर्मित योगी, जकर मन शान्त अछि, जे पाप (अक्लमसम) सँ रहित अछि आ जकर राजोगुण (व्याकुलता) शान्त भऽ गेल अछि, पूर्ण सुख प्राप्त करैत अछि।

मात्र पढ़बासँ बेसी -
अपन ध्यान वीडियो बनाउ।

पवित्र श्लोककेँ दुनियाक सङ्ग साझा करबाक लेल सुन्दर, सिनेमाई वीडियोमे बदलि दियौक। अपन पृष्ठभूमि चुनू, मंत्र ऑडियो जोड़ू, आ आधुनिक प्रारूपमे गीताक प्रकाशकेँ फैलाउ।

एहि सुविधासभ लेल ऐप डाउनलोड करू

  • उच्च गुणवत्ता वाला पृष्ठभूमि कलाकृति
  • संस्कृत आ अर्थ पाठकेँ समन्वित कयल गेल
  • इमर्सिव चैन्टिंग आ संगीत
Video Generation Preview

गहन विसर्जनक अनुभव करू

नित्य गीताक पूर्ण संस्करणक सङ्ग सिनेमाई आध्यात्मिक यात्राक शुरुआत करू। उच्च गुणवत्ता वाला मंत्र, प्रामाणिक अनुवाद, आ अपन हाथ के हथेली मे एक शांतिपूर्ण ध्यान अभयारण्य।