ज्ञानकर्मस्योग - श्लोक पद 26
ज्ञानकर्मस्योग
पद 26
श्रोतिदिनिन्द्रियान्याय संयमागनिशु जुहुती | श्रोतिनिनिन्द्रियान्याया संयमागनिशु जुहुती | 4-26 |
अनुवाद
.. 4. 26. दोसर (योगी) आगिमे वाणीके सभ इन्द्रियाक प्रक्षालन करैत छथि, आ दोसर (लोक) आगिमे वाणीके इन्द्रियाक प्रक्षालन करैत छथि।