कर्मयोग - श्लोक पद 29

कर्मयोग

पद 29

Prakrutarguṇasammudha: साजन्ते गुनकर्म्सु | तानक्रुत्स्नविद्यो मन्दानक्रुत्सन्विता | 3-29 |

अनुवाद

.. 3. 29 जे पुरुष प्रकृतिक गुणसँ मोहित होइत छथि, जे सद्गुण आ कर्मसँ जुड़ल रहैत छथि, ओ अधूरे ज्ञानक मंदबुद्धि पुरुष (अकृतस्नविदः ) पूर्ण ज्ञानक व्यक्तिसँ परेशान नहि होयबाक चाही।

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