दैवासुर सम्पद्भिभागयोग - श्लोक पद 10

दैवासुर सम्पद्भिभागयोग

पद 10

कामश्रीतापूश्रीमा मानानाडनवित। सीमित चेतनाप्रभतांतेसूचिव्रत।। 16-10।

अनुवाद

.. 16.10। अशुद्ध संकल्पक ई लोक संसारमे काज करैत छथि, अहङ्कार, सम्मान, आ गर्वसँ बनल कखनो पूरा नहि होबयवला इच्छाक शरण लैत छथि, आ मोहक मिथ्या धारणाकेँ अपनाबैत छथि।

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