विश्वरूपन्योग - श्लोक पद 43

विश्वरूपन्योग

पद 43

पिता, पुत्र आ पवित्र आत्माक उपासना।

अनुवाद

.. 11.43। अहाँ एहि दुनियाक पिता, पूज्य आ सर्वश्रेष्ठ गुरु छी। ओह माय गॉड! तीन दुनियामे अहाँ जकाँ कोनो नहि अछि, तँ अहाँसँ श्रेष्ठ कोना भऽ सकैत अछि?..

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