गीता ध्यान - श्लोक श्लोक 8
गीता ध्यान
श्लोक 8
मूकं करोति वचालं पंगुम लंघयते गिरिम्
यत्कृपा तमहं वन्दे परमानंदमाधवम्
अनुवाद
जिनकी कृपा से गूंगा वाक्पटु हो जाता है, लंगड़ा पर्वत पर चढ़ जाता है, उन आनंदमयी माधव को मेरा नमस्कार है।
मूकं करोति वचालं पंगुम लंघयते गिरिम्
यत्कृपा तमहं वन्दे परमानंदमाधवम्
जिनकी कृपा से गूंगा वाक्पटु हो जाता है, लंगड़ा पर्वत पर चढ़ जाता है, उन आनंदमयी माधव को मेरा नमस्कार है।
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