राजविद्या राजगुह्ययोग - श्लोक श्लोक 25

राजविद्या राजगुह्ययोग

श्लोक 25

यान्ति देवव्रता देवान्पितॄन्यान्ति पितृव्रताः |

भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपि माम् ||९-२५||

अनुवाद

।।9.25।। देवताओं के पूजक देवताओं को प्राप्त होते हैं, पितरपूजक पितरों को जाते हैं, भूतों का यजन करने वाले भूतों को प्राप्त होते हैं और मुझे पूजने वाले भक्त मुझे ही प्राप्त होते हैं।।

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