विश्वरूपदर्शनयोग - श्लोक श्लोक 3

विश्वरूपदर्शनयोग

श्लोक 3

एवमेतद्यथात्थ त्वमात्मानं परमेश्वर |

द्रष्टुमिच्छामि ते रूपमैश्वरं पुरुषोत्तम ||११-३||

अनुवाद

।।11.3।। हे परमेश्वर ! आप अपने को जैसा कहते हो, यह ठीक ऐसा ही है। (परन्तु) हे पुरुषोत्तम ! मैं आपके ईश्वरीय रूप को प्रत्यक्ष देखना चाहता हूँ।।

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