विभूतियोग - श्लोक श्लोक 34

विभूतियोग

श्लोक 34

मृत्युः सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च भविष्यताम् |

कीर्तिः श्रीर्वाक्च नारीणां स्मृतिर्मेधा धृतिः क्षमा ||१०-३४||

अनुवाद

।।10.34।। मैं सर्वभक्षक मृत्यु और भविष्य में होने वालों की उत्पत्ति का कारण हूँ; स्त्रियों में कीर्ति, श्री, वाक (वाणी), स्मृति, मेधा, धृति और क्षमा हूँ।।

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