दैवासुर सम्पद्-विभोग्योग - Verse छंद 17
छंद 17
Self-realization: स्थाबधा धनमनमन्दन्विता | याजने नाम याजने यास्ते दम्भेना विधानविता | 16-17 |
Translation
.. <आई. डी. 1। जेह्ड़े अपने-आप गी श्रेष्ठ मनदे न, जेह्ड़े हैरान (गौरवान्वित) होंदे न, जिंʼदे कोल धन ते सम्मान होंदा ऐ, ओह् विधियें दे बगैर छड़ा नाममात्र दे बलिदान दे कन्नै घमंड कन्नै यज्ञ करदे न।