अक्षर ब्रह्मयोग - श्लोक पद 11

अक्षर ब्रह्मयोग

पद 11

यदाक्षरम वेदविद्यासभ कहैत छथि विषान्ति या यो वीतरागः । यदि अहाँ ब्रह्मचर्यक अभ्यास करय चाहैत छी तऽ शब्द जमा करू।। 8-11

अनुवाद

.. 8. 11. जकरा वेदक विद्वान अक्षर कहैत छथि। जाहि मे बिना रागक प्रयासरत पुरुष प्रवेश करैत छथि; जकर इच्छासँ (साधक गण) ओ ब्रह्मचार्यक अभ्यास करैत छथि-ओ शब्द (लक्ष्य) हम अहाँकेँ संक्षेपमे बता देब।

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